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Best Story Of Parvez Ahmad Khan 09250045070



(Parvez Khan & wife Rehana)
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  • परवेज़   अहमद   खान   09250045070
  • BHIRTH    06/06/1958 लखनऊ
  • DEATH     07/06/2012 गाज़ियाबाद
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  • पिता  Late MOHD. सामी     Death
  • माता          सर्वर  सुल्ताना     Live
  • बहेन          Late परवीन          Death
  • भाई  जावेद  खान             Live
  • पत्नी  रहना         Live
  • बेटी  आशी , शाजी          Live
  • बेटा  शादाब                     Live
  • परवेज़  khan   जिनका  जन्म लखनऊ  के  डाली  गंज  में   06/06/1958 में  हुआ  था . परवेज़  के  पिता   मोहद . सामी  जो ३०  साल   की    उम्र  में  गुजर  गए  थे  जब  परवेज़  की  उम्र  10 वर्ष   थी   जिनकी  माता  सर्वर  सुल्ताना  थी  जीनोने  अपने  तीन  बच्चे  परवेज़    ,जावेद , परवीन  तीनो  को  सिलाई   कड़ाई  करके  पला  परवेज़  ने  पाड़ाई  लखनऊ   university   से  पूरी  की  और  लगभग  15 साल  ki  उम्र  में  गाज़ियाबाद    आ  गए  थे .वह  वे  अपने  चाचा  वाहिद  अहमद  निजामी  के  पास  कवी  नगर   में  रहे  थे .परवेज़  ने  अपनी  पहली  जॉब  हमदर्द  में  की  थी  और  २० साल  की  उमर  में  उनकी  शादी  कानपूर  के   बेकन  गंज  में  लेट  मोहद .शुबरती  की   बेटी  रहना  से  हुई .वे  लोग  गाज़ियाबाद    आ   कर  रहने  लगे  उनका  पहला  बेटा  1980  में  पैदा  हुआ  जो  की  पैदा  होते  ही  मर  गया .फिर  उनके    वह  1981  में   एक   लड़की   ने  जन्म   लिया .उन्होंने  अपनी  बेटी  का  नाम  आशी  रखा .वे  लोग  अपना  जीवन  सही  तरह  से  बिता  रहे  थे .1983  में  उनके  यहाँ  एक  लड़के  ने  जन्म  लिया  जिसे  शादाब  का  नाम  दिया  गया .परवेज़  जवानी  में  रंगीले  थे   लेकिन  वक़्त  के  साथ  सब  कुछ  बदल  गया .वे  अपनी  जिम्मेदारी  को  समझ  चुके  थे .१९८५  में  उनकी  बेहें  परवीन  की  देअथ  हो  गयी  जावेद  प्रिंटिंग  प्रेस कम   करके  अपना घर  चलाते  है  उनकी   माँ  उनके  पास  ही  रहती  थी .परवेज़  खान  पीले कुआर्टर   में  1981  में  आ  गए  थे  जो  की  उनकी  कंपनी  के  पास  कुआर्टर   बने  हुए  थे  वे  लोग  काफी  खुश  थे   और  अपना  जीवन  हसी  ख़ुशी  बिता  रहे  थे .1990  में  उनके  यहाँ  एक   लड़की  पैदा  हुई  जिसका  नाम  शाजिया  रखा  गया  लड़की  पैदा  होने  के  बाद  उनके  घर  में  मानो   और  खुशी  आ  गयी  हो  परवेज़  ने  अपने  लिए  एक  साइकिल  ली  और  अपने  बच्चो  को  रोज़  शाम  को  कंपनी  से  आकर  घुमाया  करते  थे  एक  दिन  परवेज़  को  काफी  टेंशन  थी  वो   कुछ  दिनों  से  कोई  बात  सोच  रहे  थे .और  जब  रात  को  सोने  के  लिए  गए  तो  उनोहोने  अपनी  बीवी  और  बच्चो  को  अपने  पास  बुलाया  और  कहा   के  मेरे  से  जो भी  गलती  हुई  हो  मुझे  माफ़  कर  देने  ये  सुनकर  उनका  परिवार  रोने  लगा  और  कहने  लगा  क्या  बात  है  तुम कैसी   बाते  कर रहे   हो .उन्होंने  कहा मै   जा  रहा  हु  और  ये  कह  कर  अपना  दिल  पकड़  कर  चिल्लाने  लगे  उनको  चिल्लाते  देख  पूरा  परिवार  रोने  लगा  और  उनका  बेटा  चिल्ला  कर  रोया  “नहीं  पापा   हमें  छोर  कर  मत  जाओ ” परवेज़  के  जिस्म   से  रूह   निकल  गयी  थी  और  अचानक  परिवार  के  चिल्लाते  ही  मानो  मुर्दे  में  जान  आ  गयी  हो .उनकी  रूह  वापस  आ  गयी  और  उनेह  नज़दीक  के   हॉस्पिटल    में  अदमित  करवा  दिया  और  कुछ  दिन  एडमिट   रहने  के  बाद  वो  वापस  आ   अगये .सब  लोग  बहुत  खुश  थे  फिर  से  मानो   उनके  घर  की  गाडी   रोड  पे  आ  गयी  हो .परवेज़  अपने  बच्चो  और  अपनी  बीवी  को  बहुत  चाहते  थे  और  उनकी  सबसे  खास  बाते  की  कभी  अपने  बच्चो  पे  पावंदी  नहीं  की  और न  ही  कभी  किसी  से  कोई  मतलब  रखा इसी  बात  की   तारीफ  पूरा  मोहल्ला  करता  था .वे  बहुत  ही  सज्जन  आदमी  थे  लेकिन  उनके  बच्चे  उनकी  कद्र  नहीं  करते  थे  उनपे  चिल्लाना  गुस्सा  होना  इस  बात  से  वो  काफी  दुखी  थे  और  इस  बात  की  शिकायत  वो  सबसे  करते  थे  उनकी  लड़की  की  शादी  २००३  में  लखनऊ  में  हुई  वो  अपना  दुःख  दर्द  फ़ोन  करके  अपनी   बड़ी बेटी  आशी  से  करते  थे  कहते  थे  मेरे  दोनों  बच्चे  मेरी  कद्र  नहीं  करते .और  ये   कह  कर  रोते  थे .वो   हमेशा  कहते   थे  तुम  लोग   मेरी  कद्र  मेरे  जाने  के   बाद  करोगे  उनकी  कंपनी  से  रेटायरी   14/04/2012  को  थी  जिसकी  उनोहोने  बहुत  लम्बी  प्लानिग  कर  राखी  थी  वो   हमेशा  अपनी  बीवी  रहना  से  कहते  थे   की  रिटायर  होने  के  बाद  मुंबई  घुमने  चलेंगे  और  सबी  जगह  चल्लेंगे  वो  कहते  थे  “मई  जब  रिटायर  हो  जाऊंगा  तो  नमाज़  पडूंगा   अपने  लड़के  की  शादी  करूँगा  जब  भी  उनकी  बीवी  कहती   थी  की  अब  लड़के  की   शादी  कर  देनी  चाहिए  तो  हमेशा  कहते  थे  अबी  मेरे   लड़के  को  खुल  के   जीने  दो  अभी    उसे  घर  की  पवान्दियो  में  मत  डालो  अबी  उसकी  उम्र  ही  क्या  है .और  अपनी  लड़की  को   भी  बहार  घुमने  के  लिए  कहते  थे  रिताय्री  के  बाद  के  उन्होंने  बहुत  ही  सपने  देख  रखे  थे  लेकिन  किसी  ने  सुच  ही  कहा  है  “ज़िन्दगी  सबसे  बड़ा  झूठ  है  और  मौत  सबसे  बड़ा  सुच  क्यों ? क्योंकि  जो  सपने   उन्होंने  देखे  थे  न  ही  वो  जानते  थे  aur  नहीं  उनका  अपरिवर  जनता  था  वो  और   उनका  परिवार  आगे  आने  वाले  वक़्त  से    बे-फ़िक्र  था   की  आगे  क्या  होने  वाला  है ?
  • Nov -2011 को  उनके  गले  में   एक  गाँठ  निकली  जिस  पर  उन्होंने   और  न   ही  उनके  परिवार  ने  उस  घंट  पे  ध्यान  दिया  December-2011 को  जब  गाँठ   बड़ी  हो  गयी  तो  वे  लोग  कवी  नगर  के   डोक्टर  ओमवीर   के   पास   गए   जिसने  गले  की   जांच   के   लिए  बोला  जब  गले  की  जांच  की  रिपोर्ट  आई  तो  उसमे  गले  में  कैंसर  आया  लेकिन  इस  बीमारी   पर  लोग   जल्दी  भरोसा   नहीं  करते  इसलिए  उनके  परिवार  वालो  को  भी  भरोसा  नहीं  हुआ  वे   लोग  दुसरे   डोक्टर  के  पास  गए   जिसने  भी  कैंसर  बताया  फिर  वे  लोग  Ghaziabad  के   अच्छे  डोक्टर  के  पास  टेस्ट  के  लिए  गए  जिसने  FNC के  लिए  बोला  FNC टेस्ट  होने   के  बाद  उसकी  रिपोर्ट  आई  जिसमे  कैंसर  नहीं   आया  वो  लोग  काफी  खुश  थे  अब  बात  थी  के   आखिर  ये  गाँठ   किस  चीज़  की  है  उसके  लिए  उनका   ultra sound हुआ  जिसमे  कुछ  डोट  पाए  गए  डोक्टर   को  शक  था  के  ये  डोट  कैंसर  या  T.V के  हो   सकते  उस  शक  को  दूर  करने  के   लिए  डोक्टर  ने  एक  छोटी  बिओप्स्य  करने  के  लिए  बोला  उस  टेस्ट  के  लिए  उनका  परिवार  तैयार  नहीं  हुआ   वे   लोग  Ghaziabad के  काफी डोक्टर  के   पास  गए  और  आखिर  में  जा  कर  मरियम  हॉस्पिटल  में  डोक्टर  कोठारी  ने  उनके  गले  का  ऑपरेशन  बिना   किसी  चांच  के  कर  दिया  और  ऑपरेशन  के  बाद  उनेह  घर  भेज      दिया  घर  आने  के  बाद  दो  से  तीन  दिन  बाद  गाँठ   फिर  से  उभर   आई  वे  लोग   फिर  कोठारी  के   पास  गए  कोठारी  ने  फिर  उनके  गले  में  चीरा   लगा  कर   भेज   दिया  और  पर  गाँठ  कम  नहीं  हुई  उनके  परिवार  ने  कहा    ये  गाँठ  गयी   क्यों  नहीं   तो  कोठारी  ने   कहा  के  आप  लोग  एक  MRI  करवा  लो  MRI   होने  के  बाद  उसकी  रिपोर्ट  में  कैंसर  आया  ये  सुनकर   उनका  परिवार  काफी  निराश     हो  गया  और  रोने  लगा  और  उनके  परिवार  ने  उनेह  मुंबई  के   टाटा   कैंसर  हॉस्पिटल में  ले जाने  का  फैसला किया    और  वो    लोग  01/05/2012 को  मुंबई  गए  मुंबई  में  सबसे  पहले पहुचते   ही  वो  लोग  हाजी  अली    दरगाह   गए  जहाँ      उन   लोगो    ने  उनकी  लम्बी   उम्र  की  दुआ   करी    और  दुआ    करने  के  बाद  वो   लोग  टाटा   हॉस्पिटल  में  गए  जहाँ    उनका  चेच्कुप   हुआ  और  चेचकुप   होने  के  बाद  पहले   दिन  बताया  कैंसर  इनके    खाने   की  नाली    के  अंदर    आ  गया  है  और  खाने    की  नाली   बंद   हो  गयी  है  अब  ये  खाना   अपनी  सांस    की  नाली   से  खा   रहे  है  उन्होंने  दुसरे  दिन  आने  के  लिए  बोला  दुसरे   दिन  चेकउप  हुआ  और  उनको  stage  4B  देक्लारे   कर  di   4B मतलब   3-4 month    लास्ट   है   ज़िन्दगी    के  लिए   कोई  भी  इलाज    कामयाब   नहीं  है  उनका  लड़का   साथ    था  उसने   किसी  को  नहीं  बताया   के  क्या  बीमारी  है  लड़के   ने  कहा  कैंसर  नहीं  निकला    और  डोक्टर  ने  टुमोर   की  गाँठ  बताई   है  टुमोर   भी  कैंसर  का   दूसरा    रूप   होता    है  लेकिन  उनके  परिवार   वालो  को  पता   नहीं  था  वो  लोग  हसी  ख़ुशी  घर  की  और  चल    दिए    परवेज़  के   खंडन    वालो    को  सब  को  पता    था  क्या  बीमारी  है  और  कितने    दिन  की  ज़िन्ग्दगी   अभी   इसी  लिए  सबी  लोग  कानपूर  और  लखनऊ  से  मिलने    के  लिए  आने  लगे  परवेज़   और  उनकी  wife     समझ   नहीं  पा    रहे  थे  के  ये  लोग  मिलने    क्यों    आ  रहे  है  उसके  बाद  उनका  treatment  state  हॉस्पिटल  डेल्ही   में  चला    जहाँ    के  डोक्टर  ने  कैंसर  होने  के   बाद  भी  उनकी  बिओप्स्य  करवा  दी   मुंबई  से  लोटने    के  बाद  परवेज़  ने  पलग    पकड़  लिया  था  वे  स्वर्वोद्य   हॉस्पिटल  में  भी  मुंबई  से   आने  के  बाद  एडमिट   हुए  थे  और  कुछ  दिन  इलाज     चलने   के  बाद   उनकी  हालत   काफी  घम्भीर   हो  गयी   थी  मरने   के  दो  दिन  पहले    उनेह  मौत   के  फ़रिश्ते   दिखने   लगे  थे  वो  कहते  थे  रहना   मुझे  ये  लेने   के  लिए  आ  रहे   है  और  07/06/२०१२  उनके  बर्थडे   के  ठीक   एक  दिन  बाद  सुबह   7:30am को  वो  इस  दुनिया   से  रुखसत   हो  गए  और  साथ  ही  अपनी  रेटायरी   के  बाद  के  सारे    सपने  ले   गए  उनके  परिवार  में  अब  सिर्फ   तीन  ही  लोग  रह   गए  जो अपने बाप और अपने पति के प्यार से महरूम रह गए है उनकी जो बाते याद आती है
  • उनका घर के काम का करना शाम को कंपनी से अ क्र बाज़ार जाना बच्चो के लिए चीज़ लाना आज भी न जाने हम लोगो की आँखे शाम को आँगन के बहार खड़े होकर उनकी एक झलक देखने को तरसती है और अल्लाह से यही दुआ करती है की बस एक बार हमें उनकी झलक देखने को मिल जाये  पर अब हमारे पापा आज हमारे लिए इक अपना बन के रह गए हो जो कभी हक्कीकत नहीं हो सकता पता नहीं खुदा भी अच्छे इन्सान को क्यों उठा लेता है मैंने खुदा से सिर्फ अपने पापा की 5 साल की ज़िन्दगी मांगी थी पर मेरी दुआ में शायद कही कुछ कमी थी जो मेरी दुआ कुबूल नहीं हुई खुदा भी एसा क्यों करता है जो लोग बुरे है मुझ जैसे वो इस बेह्रेहेम दुनिया पे जी रहे है और अच्छे इन्सान मेरे पापा के जैसे इस दुनिया से अलविदा कह के चले गए आज हमारा घर सूना हो गया है उनकी यादे जो  इस घर से जुडी है वो आज भी हमें पल पल याद आ के रुलाती है उनका घर का काम करना शाम को 5 pm  पे घर आना अम्मी का पापा के लिए चाये बनाना उनका कमरा उनके कपडे उनकी यादे सब हर पल हमें रुलाती है आज मेरी आमी अकेली रह गयी मै और मेरी बहने यतीम हो गयी हमारा तो कैसे न कैसे गुज़ारा चल जायेगा लेकिन हमारी अम्मी का क्या होगा जो पापा को याद करके आज भी तनहाई में रोटी है उनकी ज़िन्दगी भी एक तनाह हो कह रह गयी और इस्लाम के नियम बीवी का सुहाग चला गया और औरत को घर में चार महीने कैद कर दिया गया इददतके रूप में घर में घुट के जीने के लिए छोर गए हमारे पापा हमारी अम्मी को और हमें काश एसा होता खुदा का करिश्मा क अगर इन्सान इस दुनिया से जाता तो उसकी  यादे भी साथ चली जाती मै अपने पापा का एक ही बेटा था मेरा न कोई भाई है मेरे पापा ही मेरे लिए मेरे दोस्त और भजाई की तरह थे क्यों मुझे अकेला करके खुदा ने उसे इस दुनिए से उठा लिया जब वो ये दुनिया छोर कर गए तो हम लोग कहेते थे वो इस दुनिया से जल्दी चले गए और ये कह कर रोते थे लेकिन एक दिन उन्होंने सपने में आ के कहा मै  तो पागल और जीना चाहता था तेरी शादी बिटिया की शादी देखना छठा था ओनी रेटय्री के बाद के सारे सपने प[पूरे करना चाहता था लेकिन मेरी ज़िन्दगी तो मेरे हाथ में नहीं थी लेकिन मौत खुदा के हाथ में थी तबी मै चला गया तुम लोग जब ये कह कर रोते हो के मेरे पापा मुझे छोड़ क्यों चले गए तो मेरा सीना फट जाता है और मेरी आँखे आंसूं से भर आती है मै तो तुम्हारे स्थ ज़िन्दगी भर जीना चाहता था लेकिन मेरे हाथ में क्या था सब तो खुदा के हाथ में है अखि र्ब उसी ने हमें इस दुनिया में भेजा है तो वो ही इस दुनिया से उठा ले गा और ये तो दुनिया झूठ की दुनिया है आखिर हकीकत तो मौत है और असली ज़िन्दगी तो मौत के बाद ही शुरू होती है एक दिन तो सब को ही मर के जाना है आज मै पहले चला गया तो क्या हुआ आज थे मेरी बारी कल है तुम्हरी बरी जब मेरी आँखे खुली तो मेरी आंखे अनसुन से भरी थी दिल की धड़कन बड़ी हुई थी हाथ पैर काप रहे थे बस कहने के लिए अब है क्या हमारे पापा चले गए सब कुछ चला गया  सिर्फ   इस   बात  से  रोते  है  काश   हमने   अपने  बाप   की  इज्ज़त   करी   होती   तो  शायद   आज   हमारे    साथ    होते  लेकिन  मौत   के  आगे    तो  किसी  का  बस   नहीं  चलता   सिवाए   खुदा   के . इसी  लिए  तो   कहा  गया  है 
  • “ज़िन्दगी  सबसे  बड़ा  झूठ    इसलिए   है  इन्सान   कल    और  परसों   के   काफी   कुछ    सपने  देख   लेता   है  जो  उसके   मरने   के   बाद   झूठ  में   बदल  जाते  है  और  मौत  को  आदमी  कितना  ही  जुथ्लाता  रहे  वो  कभी  नहीं  बदलती  बदलते  है  तो  सिर्फ  हालत  और  वक़्त” ????
  • खुदाहाफिज़
  • शादाब खान
  • 09266602223
  •  
  • Thursday , August 10,1 2:43 AM     
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shah786 shah786 31-35, M Aug 10, 2012

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